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सोमवार, 12 जून 2023

ककनमठ मंदिर का इतिहास

 

🕉️ *एक ऐसा मंदिर जिसे इंसानों ने नहीं बल्कि भूतों ने बनाया था? भगवान शिव का प्राचीन मंदिर । मुस्लिम शासकों ने इसे तोड़ने के लिए गोले तक दागे, लेकिन ग्वालियर चंबल अंचल के बीहड़ों में बना सिहोनिया का ककनमठ मंदिर आज भी लटकते हुए पत्थरों से बना हुआ है । चंबल के बीहड़ में बना ये मंदिर 10 किलोमीटर दूर से ही दिखाई देता है. जैसे-जैसे इस मंदिर के नजदीक जाते हैं इसका एक एक पत्थर लटकते हुए भी दिखाई देने लगता है. जितना नजदीक जाएंगे मन में उतनी ही दहशत लगने लगती है. लेकिन किसी की मजाल है, जो इसके लटकते हुए पत्थरों को भी हिला सके. आस-पास बने कई छोटे-छोटे मंदिर नष्ट हो गए हैं, लेकिन इस मंदिर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. मंदिर के बारे में कमाल की बात तो यह है कि जिन पत्थरों से यह मंदिर बना है, आस-पास के इलाके में ये पत्थर नहीं मिलता है.*


♦️ *इस मंदिर को लेकर कई तरह की किवदंतियां हैं. पूरे अंचल में एक किवदंती सबसे ज्यादा मशहूर है कि मंदिर का निर्माण भूतों ने किया था. लेकिन मंदिर में एक प्राचीन शिवलिंग विराजमान है, जिसके पीछे यह तर्क दिया जाता है कि भगवान शिव का एक नाम भूतनाथ भी है. भोलेनाथ ना सिर्फ देवी-देवताओं और इंसानों के भगवान हैं बल्कि उनको भूत-प्रेत व दानव भी भगवान मानकर पूजते हैं. पुराणों में लिखा है कि भगवान शिव की शादी में देवी-देवताओं के अलावा भूत-प्रेत भी बाराती बनकर आए थे और इस मंदिर का निर्माण भी भूतों ने किया है.*


♦️ *कहा जाता है कि रात में यहां वो नजारा दिखता है, जिसे देखकर किसी भी इंसान की रूह कांप जाएगी. ककनमठ मंदिर का इतिहास करीब एक हज़ार साल हजार पुराना है. बेजोड़ स्थापत्य कला का उदाहरण ये मंदिर पत्थरों को एक दूसरे से सटा कर बनाया गया है. मंदिर का संतुलन पत्थरों पर इस तरह बना है कि बड़े-बड़े तूफान और आंधी भी इसे हिला नहीं पाई. कुछ लोग यह मानते हैं कि कोई चमत्कारिक अदृश्य शक्ति है जो मंदिर की रक्षा करती है. इस मंदिर के बीचो बीच शिव लिंग स्थापित है. 120 फीट ऊंचे इस मंदिर का उपरी सिरा और गर्भ गृह सैकड़ों साल बाद भी सुरक्षित है.*


♦️ *इस मंदिर को देखने में लगता है कि यह कभी भी गिर सकता है.. लेकिन ककनमठ मंदिर सैकडों सालों से इसी तरह टिका हुआ है यह एक अदभुत करिश्मा है. इसकी एक औऱ ये विशेषता है..कि इस मंदिर के आस पास के सभी मंदिर टूट गए हैं , लेकिन ककनमठ मंदिर आज भी सुरक्षित है. मुरैना में स्थित ककनमठ मंदिर पर्यटकों के लिए विशेष स्थल है. यहां की कला और मंदिर की बड़ी-बड़ी शिलाओं को देख कर पर्यटक भी इस मंदिर की तारीफ करने से खुद को नहीं रोक पाते. मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की प्रतिमायें पर्यटकों को खजुराहो की याद दिलाती हैं. मगर प्रशासन की उपेक्षा के चलते पर्यटक यदा-कदा यहां आ तो जाते हैं.*

रविवार, 11 जून 2023

लालच करने का फल

 




हम सभी लालची राजा मिदास की कहानी जानते हैं। उसके पास सोने की कमी नहीं थी, लेकिन सोना जितना बढ़ता वह और अधिक सोना चाहता।


उसने सोने को खजाने में जमकर लिया था और हर रोज उसे गिना करता था।


एक दिन जब वह सोना गिन रहा था तो एक अजनबी कहीं से आया और बोला, तुम मुझसे ऐसा कोई वरदान मांग सकते हो जो तुम्हें दुनिया में सबसे ज्यादा ख़ुशी दे।


राजा खुश हुआ और उसने कहा मैं चाहता हूँ कि जिस चीज को छुऊँ, वह सोना बन जाए। अजनबी ने राजा से पूछा क्या तुम सचमुच यही चाहते हो ?


राजा ने कहा हाँ, तो अजनबी बोला कल सूरज की पहली किरण के साथ ही तुम्हें किसी चीज को छूकर सोना बना देने की ताकत मिल जाएगी। राजा ने सोचा कि वह सपना देख होगा, यह सच नहीं हो सकता। अगले दिन जब राजा नींद से उठा तो उसने अपना पलंग छुआ और वह सोना बन गया। वह वरदान सच था।


राजा ने जिस चीज को छुआ, वह सोना बन गई। उन्होंने खिड़की के बाहर देखा और अपनी नन्हीं बच्ची को खेलते पाया। उसने अपनी बिटिया को यह अजूबा दिखाना चाहा और सोचा कि वह खुश होगी। लेकिन बगीचे में जाने से पहले उसने एक किताब पढ़ने की सोची। उसने जैसे ही उसे छुआ, वह सोने की बन गई।


वह किताब को पढ़ न सका। फिर वह नाश्ता करने बैठा, जैसे ही उसने फलों और पानी के गिलास को छुआ, वे भी सोने के बन गए। उसकी भूख बढ़ने लगी और वह खुद से बोला। मैं सोने को खा और पी नहीं सकता।


ठीक उसी समय उसकी बेटी दौड़ती हुई वहाँ आई और उसने उसे बाँहों में भर लिया। वह सोने की मूर्ति बन गई। अब राजा के चेहरे से खुशी गायब हो गई।


राजा सर पकड़ कर रोने लगा। वह वरदान देने वाली अजनबी फिर आया और उसने राजा से पूछा कि क्या वह हर चीज को सोना बना देने की अपनी ताकत से खुश है ?


राजा ने बताया की वह दुनिया के सबसे दुखी इंसान है।


राजा ने उसे सारी बात बताई। अजनबी ने पूछा, अब तुम क्या पसंद करोगे, अपना भोजन और प्यारी बिटिया या सोने के ढेर और बिटिया की सोने की मूर्ति। राजा ने गिड़गिड़ाकर माफ़ी मांगी और कहा, मैं अपना सारा सोना छोड़ दूंगा मेहरबानी कर के मेरी बेटी मुझे लौटा दो क्योंकि उसके बिना मेरी हर चीज मूल्यहीन हो गई है।


अजनबी ने राजा से कहा तुम पहले से बुद्धिमान हो गए हो और उसने अपने वरदान को वापिस ले लिया। राजा को अपनी बेटी वापस फिर से मिल गई और उसे एक ऐसी सीख मिली जिसे वह जिंदगी-भर नहीं भुला सका।

क्या सुख क्या दुःख

 



एक खरगोश अपना सामान उठाकर खुशी-खुशी जा रहा था उसे रास्ते में एक हिरन मिला । हिरन ने कहा - क्या बात है खरगोश मियाँ, बड़े खुश नजर आ रहे हो ।


मेरी शादी हो गई है । खरगोश बोला । बड़े भाग्यशाली हो भाई, हिरन ने कहा ।


शायद नहीं, क्योंकि मेरी शादी एक बहुत ही घमंडी खरगोशनी से कर दी गई है ।


उसने मुझसे बड़ा घर, ढेर सारे पैसे और कपड़े माँगे, जो मेरे पास नहीं थे । खरगोश ने उत्तर दिया ।


बड़े दुःख की बात है न , हिरन ने धीरे से कहा ।


शायद नहीं, क्योंकि मैं उसे बहुत चाहता हूँ । इसीलिए मैं खुश हूँ कि वह मेरे साथ तो है । खरगोश बोला ।


वाह, बड़े भाग्यशाली हो भाई, हिरन खुश होकर बोला ।


शायद नहीं भैया, क्योंकि शादी के अगले ही दिन मेरे घर में आग लग गई, खरगोश ने कहा ।


अरे रे। ......बड़े दुःख की बात है, हिरन बोला ।


शायद नहीं, क्योंकि मैं अपना सामान बाहर निकाल लाया और उसे जलने से बचा लिया, खरगोश बोला ।


अच्छा बड़े भाग्यशाली हो भाई, हिरन ने लंबी साँस छोड़ते हुए कहा।


नहीं भाई, शायद नहीं, क्योंकि जब आग लगी तो मेरी पत्नी अंदर सो रही थी ।


खरगोश ने उदास स्वर में कहा । ओहो, ये तो बड़े दुःख की बात है, हिरन बोला ।


नहीं, नहीं बिलकुल नहीं, क्योंकि मैं आग में कूद पड़ा और अपनी प्यारी पत्नी को सही-सलामत बाहर निकाल लाया ।


और जानते है सबसे अच्छी बात क्या हुई । इस घटना से उनसे सीख लिया है कि सबसे प्यारी चीज है जिंदगी ।


पैसा, घर और कपड़े हों या न हों लेकिन आपस का प्यार होना बहुत जरूरी है! खरगोश ने मुस्कुराते हुए कहा ।

मुहॅ से निकले शब्द वापस नहीं लिए जा सकते हैं

 मुहँ से निकले शब्द वापस नहीं लिए जा सकते ।

एक किसान ने अपने पड़ोसी की निंदा की ।


अपनी गलती का अहसास होने पर वह पादरी के पास क्षमा मांगने गया ।


पादरी ने उसको कहा कि वह पंखो से भरा एक थैला शहर के बीचोंबीच बिखेर दे ।


किसान ने वही किया, फिर पादरी ने कहा की जाओ और अब सभी पंख थैले में भर लाओ ।


किसान ने ऐसा करने की बहुत कोशिश की, मगर सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ गए थे ।


जब वह खाली थैला लेकर लौटा, तो पादरी ने कहा कि यही बात हमारे जीवन पर लागू होती है ।


तुमने बात तो आसानी से कह दी, लेकिन उसे वापस नहीं ले सकते, इसलिए शब्दों के चुनाव ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए ।

डरपोक पत्थर

डरपोक पत्थर



बहुत पहले की बात है एक शिल्पकार मूर्ति बनाने के लिए जंगल में पत्थर ढूंढने गया। वहाँ उसको एक बहुत ही अच्छा पत्थर मिल गया। जिसको देखकर वह बहुत खुश हुआ और कहा यह मूर्ति बनाने के लिए बहुत ही सही है।


जब वह आ रहा था तो उसको एक और पत्थर मिला उसने उस पत्थर को भी अपने साथ ले लिया। घर जाकर उसने पत्थर को उठा कर अपने औजारों से उस पर कारीगरी करनी शुरू कर दिया।


औजारों की चोट जब पत्थर पर हुई तो वह पत्थर बोलने लगा की मुझको छोड़ दो इससे मुझे बहुत दर्द हो रहा है। अगर तुम मुझ पर चोट करोगे तो मै बिखर कर अलग हो जाऊंगा। तुम किसी और पत्थर पर मूर्ति बना लो।


पत्थर की बात सुनकर शिल्पकार को दया आ गयी। उसने पत्थर को छोड़ दिया और दूसरे पत्थर को लेकर मूर्ति बनाने लगा। वह पत्थर कुछ नहीं बोला। कुछ समय में शिल्पकार ने उस पत्थर से बहुत अच्छी भगवान की मूर्ति बना दी।


गांव के लोग मूर्ति बनने के बाद उसको लेने आये। उनने सोचा की हमें नारियल फोड़ने के लिए एक और पत्थर की जरुरत होगी। उन्होंने वहाँ रखे पहले पत्थर को भी अपने साथ ले लिया। मूर्ति को ले जाकर उन्होंने मंदिर में सजा दिया और उसके सामने उसी पत्थर को रख दिया।

अब जब भी कोई व्यक्ति मंदिर में दर्शन करने आता तो मूर्ति को फूलों से पूजा करता, दूध से स्नान कराता और उस पत्थर पर नारियल फोड़ता था। जब लोग उस पत्थर पर नारियल फोड़ते तो बहुत परेशान होता।


उसको दर्द होता और वह चिल्लाता लेकिन कोई उसकी सुनने वाला नहीं था । उस पत्थर ने मूर्ति बने पत्थर से बात करी और कहा की तुम तो बड़े मजे से हो लोग तो तुम्हारी पूजा करते है। तुमको दूध से स्नान कराते है और लड्डुओं का प्रसाद चढ़ाते है।


लेकिन मेरी तो किस्मत ही ख़राब है मुझ पर लोग नारियल फोड़ कर जाते है। इस पर मूर्ति बने पत्थर ने कहा की जब शिल्पकार तुम पर कारीगरी कर रहा था यदि तुम उस समय उसको नहीं रोकते तो आज मेरी जगह तुम होते।


लेकिन तुमने आसान रास्ता चुना इसलिए अभी तुम दुःख उठा रहे हो। उस पत्थर को मूर्ति बने पत्थर की बात समझ आ गयी थी। उसने कहा की अब से मै भी कोई शिकायत नहीं करूँगा। इसके बाद लोग आकर उस पर नारियल फोड़ते।


नारियल टूटने से उस पर भी नारियल का पानी गिरता और अब लोग मूर्ति को प्रसाद का भोग लगाकर उस पत्थर पर रखने लगे।


Moral of the Story

सीख: हमें कभी भी कठिन परिस्थितियों से घबराना नहीं चाहिए।

मेहनत का फल

 मेहनत का फल

एक गांव में दो मित्र नकुल और सोहन रहते थे। नकुल बहुत धार्मिक था और भगवान को बहुत मानता था। जबकि सोहन बहुत मेहनती थी। एक बार दोनों ने मिलकर एक बीघा जमीन खरीदी। जिससे वह बहुत फ़सल ऊगा कर अपना घर बनाना चाहते थे।


सोहन तो खेत में बहुत मेहनत करता लेकिन नकुल कुछ काम नहीं करता बल्कि मंदिर में जाकर भगवान से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करता था। इसी तरह समय बीतता गया। कुछ समय बाद खेत की फसल पक कर तैयार हो गयी।


जिसको दोनों ने बाजार ले जाकर बेच दिया और उनको अच्छा पैसा मिला। घर आकर सोहन ने नकुल को कहा की इस धन का ज्यादा हिस्सा मुझे मिलेगा क्योंकि मैंने खेत में ज्यादा मेहनत की है।


यह बात सुनकर नकुल बोला नहीं धन का तुमसे ज्यादा हिस्सा मुझे मिलना चाहिए क्योकि मैंने भगवान से इसकी प्रार्थना की तभी हमको अच्छी फ़सल हुई। भगवान के बिना कुछ संभव नहीं है। जब वह दोनों इस बात को आपस में नहीं सुलझा सके तो धन के बॅटवारे के लिए दोनों गांव के मुखिया के पास पहुंचे।


मुखिया ने दोनों की सारी बात सुनकर उन दोनों को एक – एक बोरा चावल का दिया जिसमें कंकड़ मिले हुए थे। मुखिया ने कहा की कल सुबह तक तुम दोनों को इसमें से चावल और कंकड़ अलग करके लाने है तब में निर्णय करूँगा की इस धन का ज्यादा हिस्सा किसको मिलना ।


दोनों चावल की बोरी लेकर अपने घर चले गए। सोहन ने रात भर  जागकर चावल और कंकड़ को अलग किया। लेकिन नकुल चावल की बोरी को लेकर मंदिर में गया और भगवान से चावल में से कंकड़ अलग करने की प्रार्थना की।


अगले दिन सुबह सोहन जितने चावल और कंकड़ अलग कर सका उसको ले जाकर मुखिया के पास गया। जिसे देखकर मुखिया खुश हुआ। नकुल वैसी की वैसी बोरी को ले जाकर मुखिया के पास गया।


मुखिया ने नकुल को कहा की दिखाओ तुमने कितने चावल साफ़ किये है। नकुल ने कहा की मुझे भगवान पर पूरा भरोसा है की सारे चावल साफ़ हो गए होंगे। जब बोरी को खोला गया तो चावल और कंकड़ वैसे के वैसे ही थे।


जमींदार ने नकुल को कहा की भगवान भी तभी सहायता करते है जब तुम मेहनत करते हो। जमींदार ने धन का ज्यादा हिस्सा सोहन को दिया। इसके बाद नकुल भी सोहन की तरह खेत में मेहनत करने लगा और अबकी बार उनकी फ़सल पहले से भी अच्छी हुई।


Moral of the Story:

सीख: इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है की हमें कभी भी भगवान के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। हमें सफलता प्राप्त करने के लिए मेहनत करनी चाहिए।

कर भला तो हो भला

 एक बार एक चींटी किसी वृक्ष की शाखा पर चल रही थी। वह वृक्ष नदी के तटपर था। अचानक तेज़ हवा के झोकें से चींटी नदी में गिर पड़ी ओर बहने लगी। चींटी ने बचने का प्रयास किया, लेकिन असफल रही। अब वह सहायता के लिए इदर-उधर देखने लगी। उस चींटी की यह स्थिति अचानक पेड़ पर बैठी एक चिड़िया ने देख ली। उस चिड़िया ने तुरंत ही पेड़ की डाल से एक पत्ता तोडा ओर उसे पानी में चींटी के समीप डाल दिया। चींटी उस पत्ते पर बैठ गई। ओर वह चिड़िया पत्ते को पुंन: चोंच पर उठाकर ले गई। इस प्रकार चींटी के जीवन की रक्षा चिड़िया ने कर ली।


अब कुछ दिनों बाद उस जंगल में एक शिकारी आया और उसने उसी पेड़ के पास आकर पेड़ पर बैठी उस चिड़िया को निशाना बनाना चाहा। चिड़िया को इस बात का ज्ञान नहीं था कि शिकारी उसकी जान लेना चाहता है। अत: वह चुपचाप बैठी रही। तब उस चींटी, जो उस वृक्ष के तने पर बैठी थी, की नज़र शिकारी पर पड़ी। उसने देखा कि उसके प्राणों की रक्षा करने वाली चिड़िया का जीवन अब संकट में है तो उसने तुरन्त ही तने से उतरना आरम्भ कर दिया। वह शिकारी के पास गई और उसकी बाँह तक चढ़ गई। अब उसने उसकी बांह पर जोर से डंक मारा। इस प्रकार शिकारी का निशाना चूक गया और तीर दूसरे पत्तों पर से टकरा कर निकल गया। चिड़िया ने नीचे देखा कि शिकारी उसकी जान लेना चहता था। चींटी ने उस चिड़िया की जान बचा ली। चिड़िया के भले व्यवहार के बदले उसके भी प्राणों की रक्षा हो गई


शिक्षा- कर भला हो भला, अन्त भले का भला।

शुक्रवार, 9 जून 2023

स्वार्थ का फल


घने जंगल मे एक गुफा में लोमड़ी रहती थी। लोमड़ी शिकार करके अपनी भूख मिटाती थी।

उसकी गुफा में एक चूहा रहता था। वह चूहा लोमड़ी को बहुत परेशान करता था। वह चूहा उसे काट लेता था।

जैसे ही लोमड़ी उसे पकड़ने जाती चूहा तुरन्त अपने बिल में छुप जाता था और वह चूहा लोमड़ी का मांस भी खा जाता था।

एक दिन उसने सोचा, मुझे इस चूहे का कुछ करना पड़ेगा। लोमड़ी तुरन्त बिल्ली के पास जाती है और कहती है – बिल्ली मौसी, मेरी गुफा में एक चूहा रहता है।

मैं उससे बहुत परेशान हूँ। क्या तुम उस चूहे को पकड़ सकती हो ?

बिल्ली कहती है – ‘हाँ’, फिर वे दोनो गुफा में जाते है।

अब बिल्ली रोज गुफा की निगरानी करने लगी, अब चूहा बिल्ली के डर से बिल से बाहर ही नही आ पाता था। बाहर न आने से चूहे को खाना मिल नही पा रहा था।

अब लोमड़ी आराम से गुफा में मांस खाती और कुछ मांस बिल्ली को भी डाल देती। अब वह आराम से रहने लगे।

एक दिन भूख से परेशान चूहा जैसे ही बाहर निकला, बिल्ली ने तुरंत उसे पकड़कर मार दिया।

बिल्ली ने सोचा कि, अब तो लोमड़ी का दुश्मन मर गया है। अब लोमड़ी आराम से रहेगी। वह लोमड़ी के पास जाकर कहती है – लोमड़ी, मैने आपका दुश्मन मार दिया है।

यह सुनकर वह बहुत खुश हो जाती है।

लोमड़ी सोचती है, चूहा तो मर गया है, अब मैं इस बिल्ली को मारकर खा जाती हूँ। लोमड़ी जैसे ही बिल्ली पर झपटती है, बिल्ली तुरन्त भाग जाती है।

बिल्ली कहती है – काश, मैं स्वार्थी लोमड़ी से दोस्ती करने से पहले इसे परख लेती तो यह सब न होता।

लालच कि कहानी


एक बार एक जमीदार एक कुम्हार के घर जाता है और और वहां घर के बहार आकर कहता है ,
रामू ओ रामू, कहाँ हो बाहर आओ?
रामू कहता है – मालिक आइए, आपका स्वागत है।
जमीदार रामू से कहता है –  रामू तुम्हें ‘सात दिनों में सौ मटके बनाने है’ रामू यह सुनकर चौक जाता है
और कहता है – मालिक सात दिनों में 100 मटके कैसे बनेंगे।
जमीदार रामू से कहता है – मेरी मां की इच्छा है कि वह गरीबों में मटके दान करें। ये लो पैसे, मुझे विश्वास है कि तुम जल्द ही मटके बना दोगे।
रामू का पड़ोसी(सुरेश) अपने घर से यह सब देख रहा होता है और सोचता है, कि जमीदार को इस पर बहुत विश्वास है ना, ठीक है भरोसा कैसे तोड़ा जाता है वो मुझे अच्छी तरह पता है।
रामू बाजार जाकर मिट्टी लाता है और मटके बनाना शुरु कर देता है।
रामू एक दिन में कई सारे मटके बना लेता है।
रामू की पत्नी कहती है – सुनिए खाना खा लीजिए। आप सुबह से काम कर रहे है, जल्दी आइए। रामू खाना खाने चला जाता है।
उसका पड़ोसी(सुरेश) यह सब देख कर चौक जाता है कि रामू ने एक दिन में इतने सारे घड़े बना लिए लिए हैं।
वह सोचता है, कि रामू की जमीदार के सामने ऐसे बेइज्जती करूँगा, कि कही मुँह दिखाने लायक नही रहेगा।
सुरेश एक हलवाई के पास जाता है और कहता है – बसन्त तुम बहुत अच्छा खाना बनाते हो।
हलवाई कहता है – मैं पेशे से एक हलवाई हूं। इसलिए कभी-कभी लोगों को न्योता देकर घर पर खाना खिलाता हूँ।
सुरेश उससे कहता है – कि तुम रामू को क्यों नहीं बुलाते? जब मैंने तुम्हारे बारे में रामू से कहा तो, वह कुछ उदास हो गया।
हलवाई कहता है – ठीक है। मैं कल उसके घर जाकर खाने का न्योता दे आऊंगा।
सुरेश कहता है – कि, रामू को मत बताना कि, यह बात मैंने तुमसे कही है।
हलवाई कहता है – अरे ना – ना, मैं क्या पागल हूँ। जो मैं उससे कहूंगा।
अगले दिन हलवाई रामू के घर जाता है
और कहता है – अरे रामू, कैसे हो सब ठीक हैं।
वह कहता है – मैं ठीक हूं और यह क्या तुम मटके बना रहे हो। ‘हाँ’।
हलवाई कहता है – तुम्हें तो पता ही है, मैं एक हलवाई हूं और कभी-कभी कुछ खास लोगों को न्योता देकर खाना खिलाता हूँ।
तो आज तुम सब लोगों को, मैं न्योता दे रहा हूँ। आज तुम्हें मेरे घर पर खाना खाने के लिए आना है।
रामू कहता है – ठीक है, हम लोग शाम को तुम्हारे घर आएंगे।
शाम होते ही रामू और उसकी पत्नी दोनों हलवाई के घर जाते हैं और पीछे से सुरेश एक डंडा लेकर रामू के घर आता है और गुस्से में सारे मटके तोड़ देता है।
खाना खाने के बाद वे दोनों घर के लिए निकल जाते हैं और  कहते हैं कि, आज का खाना बहुत ही टेस्टी था, मजा आ गया।
वे दोनों जब घर पहुंचते हैं और देख कर चौक जाते जाते हैं।
कि उसके सारे मटके टूटे पड़े हैं। यह देखकर वह बहुत रोता है और कहता है कि, मैं इतनी जल्दी कम दिनों में इतने सारे मटके कैसे बनाऊंगा।
सुरेश के घर जाती है और दरवाजा खटखटाती है ,
बेटी हो बेटी दरवाजा खोल। देख, तेरी माँ आई है।
तभी पीछे से रामू की पत्नी आकर सुरेश की खिड़की पर खड़ी हो जाती है।
बेटी दरवाजा खोलती है और कहती है –  माँ, आइए आप मुझसे मिलने आई है  ‘हां’ बेटी
मां पूछती है –  दामाद जी कहां है?  माँ , वे बहुत काम कर रहे है। 
ऐसा क्या काम कर रहे है?
वह कहती है – माँ, रामू को जमीदार ने सौ मटके बनाने का काम दिया था।  उसने कई सारे मटके बना लिए थे।
जब वह शाम को खाना खाने गए थे, तब तुम्हारे दामाद ने रामू के घर जाकर सारे मटके तोड़ डाले।
अब रामू इतने कम दिनों में मटके नही बना सकता है और अब तो उसकी हिम्मत ही टूट गयी है ।
जब जमीदार रामू के यहाँ जाएंगे और उन्हें सौ मटके बने हुए नही मिलेंगे तो वे रामू की खूब बेइज्जती करेंगे।
तभी आपके दामाद सौ मटके बनाकर जमीदार को दे देंगे।
जिससे वह खूब पैसे कमाएंगे, इज्ज़त कमाएंगे और जमीदार गुस्सा होकर रामू को गाँव से बाहर निकाल देंगे।
 ( यह सब सुनकर रामू की पत्नी को बहुत गुस्सा आता है और वहाँ से चली जाती है। )
रामू की पत्नी कहती है – आप फिर से मटके बनाइये।
रामू कहता है – इतने कम समय में कैसे होगा और अब तो पैसे भी नही है।
पत्नी  – ये लो मेरे सोने के कंगन इन्हें बेचकर मिट्टी ले आइए। आप यहाँ मटके नही बनायेंगे। किसी दूसरी जगह पर बनायेंगे। 
( पत्नी सुरेश के बारे में सब कुछ बता देती है )
अगले दिन जमीदार रामू के यहां आते है।
अरे रामू, कहाँ हो? 
तभी सुरेश आ जाता है और कहता है – मालिक वह तो यहाँ नही है। उसने तो एक भी मटका नही बनाया है। पता नही कहाँ चला गया है।
जमीदार कहते है – अब मटके कहाँ से आएंगे ।
सुरेश कहता है – मालिक मेरे पास सौ मटके बने हुए है आप मेरे मटके ले सकते है।
( जमीदार सुनकर खुश हो जाता है )
तभी पीछे से रामू सौ मटके बनाकर ले आता है,
Kahani Lalach ki in Hindi - Moral Story in Hindi
जमीदार कहते है कि हमने तो सुना था, कि तुमने एक भी मटका नही बनाया है
रामू : – मालिक इस सुरेश ने मेरे सारे मटके तोड़ डाले।
सुरेश :-  तुम्हारे पास क्या सबूत है, कि मैने ही मटके तोड़े है।
रामू की पत्नी :- मैं हूँ सबूत, मैंने तुम्हारी पत्नी को उसकी माँ से बात करते हुए सुना था।
जमीदार :- सच बताओ सुरेश , वरना मैं तुम्हें गाँव से बाहर कर दूंगा।
तब सुरेश माफी मांगता है मुझे माफ़ कर दीजिए , मुझे रामू से जलन हो गयी थी और मन मे लालच आ गया था। इसलिये यह सब किया।


आत्मनिर्भर होना


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Img sr : Hasti Duniya Moral stories in Hindi

राजा अक्सर अपनी प्रजा का हाल – चाल जानने के लिए वेश बदलकर जाया करते थे। एक बार राजा गाँव से होकर जा रहे थे।

तभी सामने उन्हें एक बूढ़ा आदमी दिखाई देता है। राजा उसके पास जाकर कहते है – तुम इतने बूढ़े होकर इन लकड़ियों का बोझ क्यों  उठा रहे हो ?

बूढ़ा आदमी कहता है – मैं एक गरीब आदमी हूँ। इसलिए यह काम कर रहा हूँ।

राजा कहते है – क्या तुम्हें पता नही कि, यहाँ के राजा गरीब और बेसहारा लोगो को धन देकर मदद करते है।

बूढ़ा आदमी कहता है – अच्छी तरह मालूम है। परंतु जब तक मेरे हाथों में जान है। मेरे शरीर मे शक्ति है, तो फिर मैं दूसरो पर निर्भर क्यों रहूं।

राजा यह सुनकर बहुत खुश हो जाते है और कहते है – काश, तुम्हारी तरह और भी लोग होते तो राजा की आधी चिंता दूर हो जाती। जिससे हमारा राज्य निश्चित ही तरक्की करता।

आत्मनिर्भर होना व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण है। आत्मनिर्भर व्यक्ति बिना डरे जीता है। ऐसा व्यक्ति दूसरों की मदद लेने के बजाय दूसरों की मदद करता है।

बेटे का जन्मदिन


रात के 1:30 बजे फोन आता है, बेटा फोन उठाता है तो माँ बोलती है- 
"जन्म दिन मुबारक लल्ला" 

बेटा गुस्सा हो जाता है और माँ से कहता है - 
सुबह फोन करतीं, इतनी रात को नींद खराब क्यों की? कह कर फोन रख देता है।

थोडी देर बाद पिता का फोन आता है। बेटा पिता पर गुस्सा नहीं करता बल्कि कहता है- सुबह फोन करते

फिर पिता ने कहा - मैनें तुम्हें इसलिए फोन किया है कि "तुम्हारी माँ पागल है" जो तुम्हें इतनी रात को फोन किया। वो तो आज से 25 साल पहले ही पागल हो गई थी। 

जब उसे डॉक्टर ने ऑपरेशन करने को कहा और उसने मना किया था। वो मरने के लिए तैयार हो गई पर ऑपरेशन नहीं करवाया। 

रात के 1:30 बजे को तुम्हारा जन्म हुआ। शाम 6 बजे से रात 1:30 तक वो प्रसव पीड़ा से परेशान थी। लेकिन तुम्हारा जन्म होते ही वो सारी पीड़ा भूल गयी। उसके ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा। 

तुम्हारे जन्म से पहले डॉक्टर ने दस्तखत करवाये थे कि अगर कुछ हो जाये तो हम जिम्मेदार नहीं होंगे। तुम्हे साल में एक दिन फोन किया तो तुम्हारी नींद खराब हो गई.

मुझे तो रोज रात को 25 साल से रात के 1:30 बजे उठाती है और कहती है देखो हमारे लल्ला का जन्म इसी वक्त हुआ था,  बस यही कहने के लिए तुम्हें फोन किया था। इतना कहके पिता फोन रख देते हैं।

बेटा सुन्न हो जाता है। सुबह माँ के घर जाकर माँ के पैर पकड़कर
माफी मांगता है. तब माँ कहती है, देखो जी मेरा लाल आ गया।

फिर पिता से माफी मांगता है तब पिता कहते हैं- आज तक ये कहती थी कि हमें कोई चिन्ता नहीं हमारी चिन्ता करने वाला हमारा लाल है। पर अब तुम चले जाओ मैं तुम्हारी माँ से कहूंगा कि चिन्ता मत करो, मैं तुम्हारा हमेशा की तरह आगे भी ध्यान रखूंगा! 

तब माँ कहती है- माफ कर दो बेटा है।
सब जानते हैं दुनियाँ में एक माँ ही है जिसे जैसा चाहे कहो फिर भी वो गाल पर प्यार से हाथ फेरेगी।पिता अगर तमाचा न मारे तो बेटा सर पर बैठ जाये। इसलिए पिता का सख्त होना भी जरुरी है।

माता पिता को आपकी दौलत नहीं बल्कि आपका प्यार और वक्त चाहिए। उन्हें प्यार दीजिए। माँ की ममता तो अनमोल है।

निवेदन- इसको पढ़कर अगर आँखों में आंसू बहने लगें तो रोकिये मत, बह जाने दीजिये। मन हल्का हो जायेगा! भगवान से बढ़कर माता पिता होते हैं🙏

दुखो से मुक्ति


1 .  दुखों से मुक्ति 


एक बार भगवान बुद्ध जी एक गांव में उपदेश दे रहे थे। वहां पर एक धनी व्यक्ति उपदेश सुन रहा था। वह भगवान बुद्ध से एक प्रश्न पूछना चाहता था,

लेकिन सब लोगो के सामने प्रश्न पूछने में संकोच कर रहा था, क्योंकि उसकी गांव में काफी प्रतिष्ठा थी। प्रश्न ऐसा था, कि उसकी प्रतिष्ठा दांव पर लग जाती।

उपदेश खत्म होने के बाद जब सब लोग चले गए तब उसने बुद्ध के सामने हाथ जोड़कर प्रश्न पूछा-

प्रभु मेरे पास सब कुछ है- धन,दौलत, प्रतिष्ठा किसी भी चीज की कोई कमी नही है, लेकिन मैं खुश नही हूं, खुश रहने का राज क्या है?

मैं जानना चाहता हूं कि हमेशा खुश कैसे रहना चाहिए।



( यह सुनकर भगवान बुद्ध उसे अपने साथ जंगल मे ले गए )

और सामने एक बड़े पत्थर को देखकर कहा, कि इस पत्थर को उठाकर मेरे साथ चलो।

कुछ समय बाद उस व्यक्ति के हाथ मे दर्द होने लगा, लेकिन वह चुप रहा। काफी समय बीत जाने के बाद उससे दर्द सहा नही गया और बुद्ध जी से कहा – मेरे हाथ मे बहुत दर्द हो रहा है

बुद्ध जी ने कहा- पत्थर नीचे रख दो और पत्थर नीचे रखते ही उसे राहत महसूस हुई।

तब बुद्ध जी ने समझाया कि यही “खुश रहने का राज है।“

उस व्यक्ति को कुछ समझ नही आया।

बुद्ध जी बोले –

जिस तरह इस पत्थर को जितने समय तक हाथ मे रखोगे, उतना ही दर्द होगा। इसी प्रकार दुख के बोझ को जितनी देर तक हम अपने कंधे पर रखेंगे, उतने ही ज्यादा दुखी और निराश रहेंगे।

यदि व्यक्ति खुश रहना चाहता है तो उसे दुख के पत्थर को जल्द से जल्द नीचे रखना सीखना 

रविवार, 4 जून 2023

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    $GRAPHIC FILLPOLY MAKING CODING

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

int poly[10];

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

poly[0]=50;

poly[1]=50;

poly[2]=50;

poly[3]=100;

poly[4]=100;

poly[5]=150;

poly[6]=150;

poly[7]=150;

poly[8]=poly[0];

poly[9]=poly[1];

drawpoly(5,poly);

fillpoly(5,poly);

getch():

}

enter the ctrl+f9 to start your program.

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बुधवार, 31 मई 2023

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   $GRAPHIC DRAW POLY MAKING CODING

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

int poly[10];

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

poly[0]=50;

poly[1]=50;

poly[2]=50;

poly[3]=100;

poly[4]=100;

poly[5]=150;

poly[6]=150;

poly[7]=150;

poly[8]=poly[0];

poly[9]=poly[1];

getch():

}

enter the ctrl+f9 to start your program.

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शनिवार, 27 मई 2023

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 $GRAPHIC FLOODFILL MAKING CODING

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

setfillstyle(1,RED);

circle(300,250,50);

floodfill(305,255,WHITE);

getch();

}

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  $GRAPHIC TEXTWIDTH MAKING CODING

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

int result;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

result=textwidth("Rahul");

printf(returned value is=%d,"result");

getch():

}

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 $GRAPHIC TEXTHEIGHT MAKING CODING

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

int result;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

result=textheight("Rahul");

printf(returned value is=%d,"result");

getch():

}

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$GRAPHIC SETTEXTSTYLE MAKING CODING

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

settextstyle(GOTHIC_FONT,0,4);

getch():

}

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 $GRAPHIC SETLINESTYLE MAKING CODING

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

setlinestyle(DOTTED_LINE,1,3);

line(100,200,300,200);

}

enter the ctrl+f9 to start your program.

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

$GRAPHIC SETFILLSTYLE MAKING CODING

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

setfillstyle(1,CYAN);

rectangle(200,200,380,300);

floodfill(205,205,WHITE);

getch();

}

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 $GRAPHIC SETCOLOR MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

setcolor(2);

outtextxy(300,250,"Rahul Kumar");

getch();

}

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शुक्रवार, 26 मई 2023

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$GRAPHIC SETBKCOLOR MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

setbkcolor(2);

getch();

}

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        $GRAPHIC SECTOR MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

sector(300,250,20,200,150,160);

getch();

}

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       $GRAPHIC PIESLICE MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

pieslice(300,250,30,170,100);

getch();

}

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      $GRAPHIC OUTTEXTXY MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

outtextxy(300,250,"Rahul Kumar");

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

     $GRAPHIC OUTTEXT MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

outtext("Rahul Kumar");

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

    $GRAPHIC LINETO MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

lineto(300,250);

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

   $GRAPHIC BAR3D MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

bar3d(200,200,300,300,15,1);

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

  $GRAPHIC BAR MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

bar(200,300,40,350);

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

 $GRAPHIC FILLELLIPSE MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

fillellipse(300,250,100,50);

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

      $GRAPHIC DELAY MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

#include<dos.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

circle(200,250,30);

delay(2000);

line(250,250,340,280);

delay(4000);

arc(400,220,190,260,50);

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

     $GRAPHIC ELLIPSE MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

ellipse(300,250,0,360,100,40);

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

    $GRAPHIC LINE MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

line(300,200,450,300);

getch();

}

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   $GRAPHIC ARC MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

arc(300,250,0,50,100);

getch();

}

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ONLY USE FOR COMPUTER GRAPHICS*\\

  $GRAPHIC RECTANGLE MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

rectangle(200,200,400,300);

getch();

}

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 $GRAPHIC CIRCLE MAKING CODING$

#include<stdio.h>

#include<conio.h>

#include<graphics.h>

void main(void)

{

int gd=DETECT,gm;

initgraph(&gd,&gm,"C:\\TC\\bgi");

circle(300,250,50);

getch();

}

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ककनमठ मंदिर का इतिहास

  🕉️ *एक ऐसा मंदिर जिसे इंसानों ने नहीं बल्कि भूतों ने बनाया था? भगवान शिव का प्राचीन मंदिर । मुस्लिम शासकों ने इसे तोड़ने के लिए गोले तक द...