घने जंगल मे एक गुफा में लोमड़ी रहती थी। लोमड़ी शिकार करके अपनी भूख मिटाती थी।
उसकी गुफा में एक चूहा रहता था। वह चूहा लोमड़ी को बहुत परेशान करता था। वह चूहा उसे काट लेता था।
जैसे ही लोमड़ी उसे पकड़ने जाती चूहा तुरन्त अपने बिल में छुप जाता था और वह चूहा लोमड़ी का मांस भी खा जाता था।
एक दिन उसने सोचा, मुझे इस चूहे का कुछ करना पड़ेगा। लोमड़ी तुरन्त बिल्ली के पास जाती है और कहती है – बिल्ली मौसी, मेरी गुफा में एक चूहा रहता है।
मैं उससे बहुत परेशान हूँ। क्या तुम उस चूहे को पकड़ सकती हो ?
बिल्ली कहती है – ‘हाँ’, फिर वे दोनो गुफा में जाते है।
अब बिल्ली रोज गुफा की निगरानी करने लगी, अब चूहा बिल्ली के डर से बिल से बाहर ही नही आ पाता था। बाहर न आने से चूहे को खाना मिल नही पा रहा था।
अब लोमड़ी आराम से गुफा में मांस खाती और कुछ मांस बिल्ली को भी डाल देती। अब वह आराम से रहने लगे।
एक दिन भूख से परेशान चूहा जैसे ही बाहर निकला, बिल्ली ने तुरंत उसे पकड़कर मार दिया।
बिल्ली ने सोचा कि, अब तो लोमड़ी का दुश्मन मर गया है। अब लोमड़ी आराम से रहेगी। वह लोमड़ी के पास जाकर कहती है – लोमड़ी, मैने आपका दुश्मन मार दिया है।
यह सुनकर वह बहुत खुश हो जाती है।
लोमड़ी सोचती है, चूहा तो मर गया है, अब मैं इस बिल्ली को मारकर खा जाती हूँ। लोमड़ी जैसे ही बिल्ली पर झपटती है, बिल्ली तुरन्त भाग जाती है।
बिल्ली कहती है – काश, मैं स्वार्थी लोमड़ी से दोस्ती करने से पहले इसे परख लेती तो यह सब न होता।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें