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रविवार, 11 जून 2023

मुहॅ से निकले शब्द वापस नहीं लिए जा सकते हैं

 मुहँ से निकले शब्द वापस नहीं लिए जा सकते ।

एक किसान ने अपने पड़ोसी की निंदा की ।


अपनी गलती का अहसास होने पर वह पादरी के पास क्षमा मांगने गया ।


पादरी ने उसको कहा कि वह पंखो से भरा एक थैला शहर के बीचोंबीच बिखेर दे ।


किसान ने वही किया, फिर पादरी ने कहा की जाओ और अब सभी पंख थैले में भर लाओ ।


किसान ने ऐसा करने की बहुत कोशिश की, मगर सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ गए थे ।


जब वह खाली थैला लेकर लौटा, तो पादरी ने कहा कि यही बात हमारे जीवन पर लागू होती है ।


तुमने बात तो आसानी से कह दी, लेकिन उसे वापस नहीं ले सकते, इसलिए शब्दों के चुनाव ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए ।

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